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शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

तितलियो को घर में पाला नहीं जाता .........


जो तूफानों से खेलते है उन्हें, हवाओं से डर नहीं लगता
जो समंदर में पलते हो उन्हें घटाओ से डर नहीं लगता,
हर ठोकर से कुछ सीख कर गुजरा हूँ मैं,
अब मुझे मार कर सिखाने वाले रहनुमाओं से डर नहीं लगता
अब मुझे मार कर सिखाने वाले रहनुमाओं से डर नहीं लगता........

जश्न-ए-इजहार क्या ख़ाक होता जब बात कुछ बढ़ी नहीं,
कभी नशे में वो रहे, कभी नशे में हम रहे...........

एक कतरा बन कर समंदर पर सवार हूँ तेरे लिए,
सुना है- "डूबते को तिनके का सहारा बहुत होता है".........


मेरी फकीरी मेरे किरदार की खता है यारो,
मेरी फकीरी मेरे किरदार की खता है यारो,
"मेरी जिंदगी नहीं, जिंदादिली ने ठगा है मुझे......."

पत्थरो से रस निकाला नहीं जाता,
फूलो पर वजन डाला नहीं जाता,
घर के चौबारे तक ही रहे, तो खूब जँचती है,
तितलियो को घर में पाला नहीं जाता
तितलियो को घर में पाला नहीं जाता .........



                                    कवि प्रभात "परवाना"
वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/ 




बुधवार, 24 अगस्त 2011

जिहादी हमला!!! सब ख़तम......



आतंकवादी  हमलो पर लिखी कविता....(इस कविता को सुनते सुनते जाने कितने लोग रो पड़े.) दिल से महसूस करते हुए पढ़े...



इंसान को हैवान बना देते है लोग,
हद्द हर नीचता की जता देते है लोग
और जिन बच्चो को, अभी खबर ना थी, अपने नाम की यारो,
उन्हे जिहाद क्या होता है, सिखा  देते है लोग......


रास्ता ए लहू अपना लेते है लोग,
लहू सस्ता हो जैसे नीर से, ऐसे बहा देते है लोग,
मिली क्या ख़ुशी उन्हे, देख कर लाशें,
क्यू अमनो-चैन जिंदा, दफ़ना देते है लोग


ये भाई ना रहा, ये बाप ना रहा
उसके सर पर उसकी माँ का, अब हाथ ना रहा
तन्हा जो घूमता था, चौराहो पर कभी
अब तन्हाई का भी उसकी, कोई साथ ना रहा
चल रहा था जो अभी, खुशी खुशी यहा
क्यू बेजान उस इंसान को, बना देते है लोग.....


सज-धज के चल रही थी, जिसकी दुल्हन अभी,
पढ़ रहा था मुन्ना, ए,बी,सी,डी यही
गया था बाजार लेने, भाई सब्जियाँ
गूंद रही थी मा उसकी, आटा यही कही
चहकती बुल बुल,,,कोयल,,,उड़ते थे परिंदे..जहा
क्यू वीरान उस स्थान को बना देते है..
क्यू वीरान उस स्थान को बना देते है..


और जिन बच्चो को, अभी खबर ना थी, अपने नाम की यारो,
उन्हे जिहाद क्या होता है सिखा  देते है लोग
उन्हे जिहाद क्या होता है सिखा  देते है लोग....


प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"