गुरुवार, 19 जुलाई 2012

हमले होते रहेंगे.....


अक्सर लोग कहते है प्रभात जी आप अपनी लेखनी में इतना विकराल रूप कैसे रखते है?
अभी हाल में में प्रचलित मेरी कविता "हमले होते रहेंगे" पर भी लोगो ने इसी तरह की प्रतिक्रिया दी

मित्रो आप ही बताओ जब इस देश का पढ़ा युवा नौकरी के लिए भटके , आटा चीनी चावल तेल का भाव इतना की व्यक्ति उलझन में पड़ जाए की परचून की दूकान पर लेने जाए, या सुनार की।


और जनता की मेहनत के पैसे से विधायक अपनी गाडी में पेट्रोल भरवा कर काले शीशे चढ़ा कर इस तरह मुह फेर कर निकल जाए जैसे आम जनता अछूत हो।.


एक तरफ रोज 20 लाख लोग  भूखे पेट सोते हों  और दूसरी तरफ कसाब को बिरयानी और जेड प्लस सुरक्षा मुहैया करवाई जाए
क्या एक सच्चे देश प्रेमी का खून नहीं खौलेगा ?????


मेरी एक कविता की विडियो आपके हवाले करता हूँ,सिर्फ पांच मिनट मुझे मेरे शब्दों को मेरी कविता को दीजिये।


आप भी कहेंगे इन्कलाब जिंदाबाद 


http://www.youtube.com/watch?v=L6x-RfQcoJ8
---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
 वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/
 

शनिवार, 14 जुलाई 2012

खूबसूरत है तू जिंदगी के लिए .......


खूबसूरत है तू जिंदगी के लिए , 
मौसम है हसीं आशिकी के लिए ...........

कांटे चुभते रहे, और मैं हँसता रहा ,
फूल चुनता रहा बंदगी के लिए...........

यूँ तो गुल से भरा था मेरा आशियाँ 

दिल मचलता रहा एक कली के लिए........

अश्को-गम का समन्दर ही जो दे सका,
मैं तड़पता रहा बस उसी लिए.............

इतने खाए है खंजर ज़माने से सुन
हाथ उठता नहीं दोस्ती के लिए ............

---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
 वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/

रविवार, 17 जून 2012

एक जिस्म पर कई किरदार देखिये .....



एक नहीं हुज़ूर, सौ बार देखिये'
एक जिस्म पर कई, किरदार देखिये
मुनाफा खूब हो भी, तो क्यों ना हो 
गर्म है नकाब का, बाज़ार देखिये ......

सियासत, आप खुद ही जान लोगे
चोर को बना के पहरेदार देखिये.....

वफ़ा, प्यार, दोस्ती, मैं सब निभाता रहा 
और मैं ही बन गया हूँ गुनेहगार देखिये........

बुजुर्गो की निशानी नीलाम हो रही है,
मुझ पर यकीं नहीं,  इश्तेहार देखिये........

बेटी बेच आया बाप, दो रोटी के वास्ते 
खबर पक्की है साहब, अखबार देखिये.........

---------------------------------कवि  प्रभात "परवाना"

मंगलवार, 12 जून 2012

नशा मुक्ति केंद्र- हिला देने वाला अनुभव



दोस्तों आज आपसे एक बेहद ही खास अनुभव शेयर करता हूँ, 
जैसा कि आपको पता है हमारी संस्था ज्योति जागरूक समय समय पर कुछ ना कुछ सामाजिक काम जैसे अनाथ बच्चो कि मदद , वृद्ध आश्रम में आयोजन नशा मुक्ति केंद्र में काउंसलिंग आदि आदि करती रहती है ..

हाँ तो इस बार हमारी संस्था ने दिल्ली के द्वारका में स्थित नशा मुक्ति केंद्र में प्रोग्राम किया..
आप हैरान रह जाएंगे ये सोच कर कि वह क्या हुआ,.
मेरे शरीर का एक एक रोंगटा खड़ा हो गया वहा  आये हुए रोगियो को  देखकर..
अरे छोटे छोटे बच्चे 9 - 10 साल के बच्चे नशा मुक्ति केंद्र में जिन्हें अपना नाम लेना नहीं आता था वो नशा मुक्ति केंद्र में..
कोई माँ का पर्स चुरा कर नशा करता था, कोई भाई का मोबाइल बेचकर..
एक से एक सरकारी नौकरी में रह चुके एयर फ़ोर्स के व्यक्ति वह मौजूद थे जो नशा छुड़ाना चाहते थे..
पर सबसे बड़ा आश्चर्य मुझे उन छोटे छोटे बच्चो का हुआ ...

एक और हिला देने वाला अनुभव:--
एक बच्चे को ऐसा  नशा था की वो अपने आप को ब्लेड से काटता था..
समझे नहीं ??????

 मैं भी नहीं समझा था..
खुद को जख्मी करने का नशा..'
पूरा सर अपना ही अपने ही हाथो ब्लेड से काट रखा था. हालत ये थी की आप जख्म देख भी नहीं सकते ..और ना मैं आपको दिखा  सकता ..
मैंने वहा  उनकी काउंसिलिंग की..उन्हें नशा से होने वाली हानिया और नशा मुक्ति के उपाय भी बताये
ये भी बताया की नशे की हुड़क लगे तो क्या करना है .
पूरी विडिओ १८ मिनट की है.. 


शायद विडिओ की आवाज समझने में थोड़ी परेशानी हो..
लेकिन ये समझना उतना भी मुश्किल नहीं जितना नशे के साथ जीवन यापन करना.
मित्रो शुभ काम में देश भर से लोग हमारे साथ जुड़ रहे है. अगर आप भी हमसे जुड़ना चाहते है तो हमारी संस्था के नंबर 9212233555 पर संपर्क करे..

इस विडिओ को ज्यादा से ज्यादा फैलाए ताकि शायद किसी ऐसे व्यक्ति के पास पहुचे जो नशा छोड़ना चाहता हो..

---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"


शुक्रवार, 8 जून 2012

पढ़ा लिखा युवा क्यू भटक रहा है ???


मित्रो बात ३ जून की है,, बाबा रामदेव जी के धरने वाले दिन की,
जंतर मंतर पर मेरे दूर -दराज से मित्र और कई प्रशन्शक मिलने आए थे..
अब कोई इतना दूर से आए और मैं ना जाउ. एसा नही हो सकता..
गुजरात से स्वामी जी, जे. पी. जी, बृजेश भाई , जनार्दन भाई और भी करीब ३०-४० राष्ट्रवादी भाई जमा हुए थे,
और आग्रह हो गया एक कविता का.
कविता का अचानक से आग्रह होने पर कुछ पंक्तिया सुनाई जिन्हने बृजेश भाई ने कैमरे मे क़ैद कर लिया.. http://youtu.be/VJfBmK9pGIM
इन पंक्तियो मे कुछ एसि पंक्तिया है जिन मे बताया गया है आज का पढ़ा लिखा युवा क्यू भटक रहा है

-- >युवा पढाई कि बजाय आसान रास्ते से पैसा कमाने कि क्यों सोच रहा है,
-->युवा चोरी डकैती और लूटपाट कि तरफ क्यों भाग रहा है,
-->हैकिंग में युवाओं का रुझान क्यों बढ गया है,
-->ए टी एम् तोडना , नशीले पदार्थो कि बिक्री, काले धंधे पढ़ा लिखा युवा क्यों अपना रहा है,,
आपके सामने एक विडिओ रखता है, देखिये और अगर आपको मेरा नजरिया पसंद आये तो शेयर भी करे
http://youtu.be/VJfBmK9pGIM


---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
 वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/

गुरुवार, 7 जून 2012

मुँह पे ताले पड़ते देखे है.....


मेहनतकश को दो रोटी के लाले पड़ते देखे है
बलिदानों के शिलालेख पर जाले पड़ते देखे है,
जब जब हमने खंगाले, कच्चे चिट्ठे सरकारों के,
सी एम् से पी एम् तक 
मुँह
पे ताले पड़ते देखे है...

कविता को  हथियार बना कर, गाना मैंने सीखा है,

नोक कलम की होती है,पर भाले पड़ते देखे है 

---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
 वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/

                      

शनिवार, 2 जून 2012

एक काफिला मेरा घर जलाने आ गया........


अभी हाल ही में मथुरा में हुए हिन्दू मुस्लिम दंगो पर लिखी कविता
इसे हिन्दू या मुस्लिम मान कर नहीं, इंसान मान कर पढ़े....

 
काम करू सच्चा तो मतलब पूछ लेते है लोग
और बात कहू कडवी तो मजहब पूछ लेते है लोग

मुझे मेरी औकात बताने आ गया,
एक काफिला मेरा घर जलाने आ गया
कि कच्ची नींद में होगी, मुन्नी मगर देखो,
रास ना था चैन, उसको जगाने आ गया

क्या खूब कारीगर है खंजर और तमंचो का

मेरी गालिओ को खूं से सजाने आ गया

एक काफिला मेरा घर जलाने आ गया.....


इधर मरहम बिना था जख्म, देखो मुफलिसी मेरी,

उधर वो शूल का अस्तर लगाने आ गया

एक काफिला मेरा घर जलाने आ गया........


-----------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
 वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/


गुरुवार, 31 मई 2012

कविता की क्यारी....


आओ मैं आपको अपनी कविता की क्यारी में ले चलू,
जहा मैंने चंद छोटे छोटे शेर बोये है,
जिन्हें मैं अपनी भावनाओं के जल से सीचूंगा
और कुछ दिनों में ये ग़ज़ल का रूप ले लेंगे

वहा दूर प्रतिभा की मिटटी में- मैंने कविता बोईं थी

जिन पर मंच माफियाओं की ऊँची अट्टालिकाओ ने
प्रसिद्धि का सूरज ना पड़ने दिया
और
अंतत: वे मुरझा गयी ..

पर मुझे अटल विश्वास है

उनके अहम् की आंधी उनकी ऊँची अट्टालिकाओ को जल्द ही जर्जर कर देगी
और मेरे गीत ग़ज़ल नगमो पर भी
किसी पारखी की नज़र पड़ेगी,
और मैं उन तमाम उपलभ्धियो को पा सकूँगा जिनका मैं अधिकार रखता हूँ .......


---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
 वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/


रविवार, 27 मई 2012

बेटा नहीं सपोला पाला था..


बेटा नहीं सपोला पाला था मैंने-( एक वृद्ध आश्रम में अपने अंतिम दिन गुजार रहे वृद्ध का कथन )
ये शब्द सुनकर मेरी आत्मा सिहर उठी,

आज वृद्ध आश्रम में एक छोटा सा प्रोग्राम किया, वहा हमने बुजुर्गो के स्वास्थ के लिए कुछ खाद्य सामग्री के साथ साथ जूस आदि की व्यवस्था की थी , उनके मनोरंजन के लिए एक मैजिक शो के साथ साथ मेरी कविताओं का आयोजन था विडियो देखने के लिए क्लिक करे :-
http://www.youtube.com/watch?v=ZpHL2Gm4IlQ&feature=youtu.be

हमने उनका दर्द जरुरत महसूस किया, वाकई अगर आप लोग वहा होते तो आत्मा हिल जाती,,

उनके कहे एक एक शब्द दिल में चुभ रहे थे

एक बुजुर्ग ने बताया ऊनके बेटे और बेटी नहीं है उनकी शादी होते ही उनके पति ने उनको धोखा दे दिया

फिर उन्होंने बिना किसी कानूनी तलाक के उनसे किनारा कर लिया,

अब उन्होंने एक बेटी अडोप्त की जो अमेरिका में है(5-6 महीने में उन्हें 10,000 रूपये भेज देती है) , उन माता जी की खुद की अच्छी खासी सरकारी पेंशन आती है

किसी चीज की कोई कमी नहीं बस अपनेपन की कमी थी जिसे मैंने अपनी कविताओं से दूर करने की कोशिश की

एक बुजुर्ग महिला ने बताया की कैसे उनके परिवार वालो ने उन्हें धोखे से वृद्ध आश्रम छोड़ दिया


इस छोटी सी पहल से दिल का बोझ हल्का हो गया की आज हमने किसी की मदद की, भगवान् हमें इसी काबिल बनाये रखे , अगर आप हमसे जुड़ना चाहते है तो कोई शुल्क नहीं है, आप हमसे 9212233555 पर संपर्क कर सकते है


विडियो का लिंक :-
http://www.youtube.com/watch?v=ZpHL2Gm4IlQ&feature=youtu.be

इसे इतना शेयर करे की कोई बेटा अपने माँ बाप को कभी वृद्ध आश्रम ना छोड़े

---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
 वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/

मंगलवार, 22 मई 2012

अंधे संभलकर चलने लगे है ........


अंधे संभलकर जो चलने लगे है 
दीद वाले नैनो को मलने लगे है 
कुछ इस तरह  बदली ज़माने ने करवट 
अपने ही अपनों को छलने लगे है  ......

यकीनन ज़माना खराब आ गया 
जुगनुओ को डराने आफताब आ गया
पिघलते मोम से पूछा :-हाल ए जिंदगी मैंने 
गिर कर हाथ पर बोला:-जवाब आ गया???

जीने कि जद्दोजहद में इतना उलझ गया हूँ मैं 
कि खुद को ही कही  रखकर भटक गया हूँ मैं
बरसो बाद आइना देख कर पता चला
जर्जर हूँ , बिखरा हूँ , टूटा हूँ, और चटक गया हूँ मैं


---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"