मंगलवार, 11 सितंबर 2012

छोटे भैया को फिर रण मे भेज दूँगी.....


रक्षाबंधन के दिन भाई और बहन के बीच वार्तालाप चल रहा है,
भाई को सीमा पर देश की रक्षा के लिए जाना है
सीमा पर जाने से पहले बहन से  हुए वार्तालाप की कुछ कड़ियाँ

बाँध कर सर पर कफ़न, सरहद पर खड़े होते है,
जब याद आती है घर की, चुपके चुपके रोते है,
और वो क्या समझेंगे, मेरे दिल की तड़प , मेरे दिल की आह,
जो नेता सारे आम संसद मे सोते है


कफस पड़ा ही रह जाए, रक्त की धार छूट जाए,
धड़कन बंद हो जाए, साँस की रफ़्तार रूठ जाए
मुझे माफ़ करना बहन, गर
जंग मे राखी का तार टूट जाए

तू ना सही भैया ,
तेरी यादो को सहेज लूँगी,
गर्व के मौके पर गम क्यू करू?
छोटे भैया को फिर रण मे भेज दूँगी.

टूट तो ना जाओगी मेरी लाश देखकर,
माँ के बहते अश्रुओ की धार देखकर,
मुन्नी और गुड्डू की चीत्कार  देखकर ,
और मेरी जेब से मिला वो पत्र बार बार देखकर

माँ को रोता, भाभी को बिलखता
मुन्नी और गुड्डू को चीखता
और तुमको तिरंगे मे लिपटा देख लूँगी
गर्व के मौके पर गम क्यू करू?
छोटे भैया को फिर रण मे भेज दूँगी.

भारत माँ के पाक गले का वो हार हो जाए
कुलदीप वाले ख्वाब तार तार हो जाए
बोलो बहना तब बाकी क्या बचा
छोटा भाई गर जंग मे शिकार हो जाए

अर्थी पर पुष्प चढ़ाऊँगी
श्रद्धा  से शीश नवाउंगी
मैं माथे तिलक लगाऊँगी
फिर बह्र्मस्त्र अपनाउंगी
मैं रणचंडी बन जाउँगी 
तब मैं रण मे जाउँगी 
तब मैं रण मे जाउँगी 


        कवि प्रभात "परवाना"
 वेबसाईट का पता:- www.prabhatparwana.com


     
                                        

बुधवार, 22 अगस्त 2012

नज़र कोई अपना नहीं आता.......



बुलंदी से गिरा, भीड़ में जा मिला,
भीड़ में नज़र कोई अपना नहीं आता....

एक रोज़ गौर से ऐसी मुफलिसी देखी,
कि उस रात से मुझे कोई सपना नहीं आता....

अमीरे-शहर खुद को वो लोग कहने लगे
जिन्हें ठीक से तन को ढंकना नहीं आता .........

वापस ले लो अपनी दुआए ज़माने वालो,
मुझे एहसान किसी का रखना  नहीं आता........


        कवि प्रभात "परवाना"
 वेबसाईट का पता:- www.prabhatparwana.com


बुधवार, 8 अगस्त 2012

मुझे भी ज़माने सा कर दे....


मेरे वजूद को किसी कत्लखाने सा कर दे,
ए-खुदा मुझे भी ज़माने सा कर दे....

ख़ौफ़ सुगबुगाहट सिसकियाँ और वीरान मंज़र
मुझे किसी मरघट के शामियाने सा कर दे .......

यूँ तो नसीब ना होंगे उनके लब कभी
करामात कर एसी मुझे पैमाने सा कर दे .......

रिंदो की बस्ती मे कर दे बसर मेरा
या खुदा मुझे किसी मैखाने सा कर दे........

सुना है बहुत हसीन मौत होती है प्यार मे
सब छोड़ चल, मुझे किसी दीवाने सा कर दे..........


        कवि प्रभात "परवाना"
 वेबसाईट का पता:- www.prabhatparwana.com



रविवार, 5 अगस्त 2012

इन्कलाब कहने से इन्कलाब नही आता.....

छोटी सोच में कभी फैलाव नही आता
पोखरों में कभी सैलाब नही आता
और खानी पड़ती है हस के सीने पर गोलिया
बस इन्कलाब कहने से इन्कलाब नही आता


---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
 वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.
webs.com/


शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

उर्दू भवन में काव्यपाठ ....



मित्रो अभी पीछे दिल्ली के मशहूर "उर्दू भवन" में मुझे काव्य पाठ के लिए बुलाया गया..
काफी लोग आये हुए थे, काव्य पाठ सुनने के लिए..
कुछ नया लिखा हुआ था, पर हर कवि कि कुछ एक रचनाये ही ऐसी होती है जिन्हें मंच पर सबसे ज्यादा प्यार मिलता है..
वह कवि उन्ही रचनाओं से प्रस्सिध हो जाता है, कुछ एसा ही मेरे साथ भी है,,
हालांकि मैं कोशिश करता हूँ कि ज्यादा से ज्यादा नया लिखा हुआ सुना पाऊ, पर जनता वही पुराना वाला सुनने को बेताब रहती है..

दो महीने पहले दी हुई प्रस्तुति कि विडियो आज जा कर मिली है..

आपसे बाटना चाहूँगा, आप लोगो के प्यार से प्रस्तुति इतनी उम्दा हुई कि आयोजक ने दो बार मंच पर बुला कर कविता पाठ करवाया

दोनों लिंक आपसे बाटना चाहूँगा..


पहली लिंक http://www.youtube.com/watch?v=MQxDDyTUZoU

दूसरी लिंक
http://www.youtube.com/watch?v=qaeF6ftzZ5k


---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
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मंगलवार, 24 जुलाई 2012

अब अवतार लो गोविन्द.......

कृष्ण जन्माष्टमी के लिए विशेष रूप से लिखी रचना
(आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की ढेर सारी शुभकामनाये)


अब अवतार लो गोविन्द, अब अवतार लो गोविन्द
भज स्वीकार लो गोविन्द, भज स्वीकार लो गोविन्द...........

झूठ कपट छल चोरी अब तो हो रही बीच बाज़ार

नंग खड़ा है मानव देखो करने को व्यापार

कर उद्धार दो गोविन्द , कर उद्धार दो गोविन्द

अब अवतार लो गोविन्द, अब अवतार लो गोविन्द...........

माखन रोता, मिश्री रोती , रोये कदम्ब की डाली

तज डाला है नाम हरी का, मुह पे रहती गाली

गीता सार दो गोविन्द, गीता सार दो गोविन्द

अब अवतार लो गोविन्द , अब अवतार लो गोविन्द...........

हम भी समझे, तुम भी समझे, समझे ये जग सारा
मिथ्या है माया में फंसना, हरि का नाम है प्यारा

भव से तार दो गोविन्द, भव से तार दो गोविन्द
अब अवतार लो गोविन्द, अब अवतार लो गोविन्द...........


---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"

वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/


गुरुवार, 19 जुलाई 2012

हमले होते रहेंगे.....


अक्सर लोग कहते है प्रभात जी आप अपनी लेखनी में इतना विकराल रूप कैसे रखते है?
अभी हाल में में प्रचलित मेरी कविता "हमले होते रहेंगे" पर भी लोगो ने इसी तरह की प्रतिक्रिया दी

मित्रो आप ही बताओ जब इस देश का पढ़ा युवा नौकरी के लिए भटके , आटा चीनी चावल तेल का भाव इतना की व्यक्ति उलझन में पड़ जाए की परचून की दूकान पर लेने जाए, या सुनार की।


और जनता की मेहनत के पैसे से विधायक अपनी गाडी में पेट्रोल भरवा कर काले शीशे चढ़ा कर इस तरह मुह फेर कर निकल जाए जैसे आम जनता अछूत हो।.


एक तरफ रोज 20 लाख लोग  भूखे पेट सोते हों  और दूसरी तरफ कसाब को बिरयानी और जेड प्लस सुरक्षा मुहैया करवाई जाए
क्या एक सच्चे देश प्रेमी का खून नहीं खौलेगा ?????


मेरी एक कविता की विडियो आपके हवाले करता हूँ,सिर्फ पांच मिनट मुझे मेरे शब्दों को मेरी कविता को दीजिये।


आप भी कहेंगे इन्कलाब जिंदाबाद 


http://www.youtube.com/watch?v=L6x-RfQcoJ8
---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
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शनिवार, 14 जुलाई 2012

खूबसूरत है तू जिंदगी के लिए .......


खूबसूरत है तू जिंदगी के लिए , 
मौसम है हसीं आशिकी के लिए ...........

कांटे चुभते रहे, और मैं हँसता रहा ,
फूल चुनता रहा बंदगी के लिए...........

यूँ तो गुल से भरा था मेरा आशियाँ 

दिल मचलता रहा एक कली के लिए........

अश्को-गम का समन्दर ही जो दे सका,
मैं तड़पता रहा बस उसी लिए.............

इतने खाए है खंजर ज़माने से सुन
हाथ उठता नहीं दोस्ती के लिए ............

---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
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