बुधवार, 22 अगस्त 2012

नज़र कोई अपना नहीं आता.......



बुलंदी से गिरा, भीड़ में जा मिला,
भीड़ में नज़र कोई अपना नहीं आता....

एक रोज़ गौर से ऐसी मुफलिसी देखी,
कि उस रात से मुझे कोई सपना नहीं आता....

अमीरे-शहर खुद को वो लोग कहने लगे
जिन्हें ठीक से तन को ढंकना नहीं आता .........

वापस ले लो अपनी दुआए ज़माने वालो,
मुझे एहसान किसी का रखना  नहीं आता........


        कवि प्रभात "परवाना"
 वेबसाईट का पता:- www.prabhatparwana.com


बुधवार, 8 अगस्त 2012

मुझे भी ज़माने सा कर दे....


मेरे वजूद को किसी कत्लखाने सा कर दे,
ए-खुदा मुझे भी ज़माने सा कर दे....

ख़ौफ़ सुगबुगाहट सिसकियाँ और वीरान मंज़र
मुझे किसी मरघट के शामियाने सा कर दे .......

यूँ तो नसीब ना होंगे उनके लब कभी
करामात कर एसी मुझे पैमाने सा कर दे .......

रिंदो की बस्ती मे कर दे बसर मेरा
या खुदा मुझे किसी मैखाने सा कर दे........

सुना है बहुत हसीन मौत होती है प्यार मे
सब छोड़ चल, मुझे किसी दीवाने सा कर दे..........


        कवि प्रभात "परवाना"
 वेबसाईट का पता:- www.prabhatparwana.com



रविवार, 5 अगस्त 2012

इन्कलाब कहने से इन्कलाब नही आता.....

छोटी सोच में कभी फैलाव नही आता
पोखरों में कभी सैलाब नही आता
और खानी पड़ती है हस के सीने पर गोलिया
बस इन्कलाब कहने से इन्कलाब नही आता


---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
 वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.
webs.com/


शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

उर्दू भवन में काव्यपाठ ....



मित्रो अभी पीछे दिल्ली के मशहूर "उर्दू भवन" में मुझे काव्य पाठ के लिए बुलाया गया..
काफी लोग आये हुए थे, काव्य पाठ सुनने के लिए..
कुछ नया लिखा हुआ था, पर हर कवि कि कुछ एक रचनाये ही ऐसी होती है जिन्हें मंच पर सबसे ज्यादा प्यार मिलता है..
वह कवि उन्ही रचनाओं से प्रस्सिध हो जाता है, कुछ एसा ही मेरे साथ भी है,,
हालांकि मैं कोशिश करता हूँ कि ज्यादा से ज्यादा नया लिखा हुआ सुना पाऊ, पर जनता वही पुराना वाला सुनने को बेताब रहती है..

दो महीने पहले दी हुई प्रस्तुति कि विडियो आज जा कर मिली है..

आपसे बाटना चाहूँगा, आप लोगो के प्यार से प्रस्तुति इतनी उम्दा हुई कि आयोजक ने दो बार मंच पर बुला कर कविता पाठ करवाया

दोनों लिंक आपसे बाटना चाहूँगा..


पहली लिंक http://www.youtube.com/watch?v=MQxDDyTUZoU

दूसरी लिंक
http://www.youtube.com/watch?v=qaeF6ftzZ5k


---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
 वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/

मंगलवार, 24 जुलाई 2012

अब अवतार लो गोविन्द.......

कृष्ण जन्माष्टमी के लिए विशेष रूप से लिखी रचना
(आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की ढेर सारी शुभकामनाये)


अब अवतार लो गोविन्द, अब अवतार लो गोविन्द
भज स्वीकार लो गोविन्द, भज स्वीकार लो गोविन्द...........

झूठ कपट छल चोरी अब तो हो रही बीच बाज़ार

नंग खड़ा है मानव देखो करने को व्यापार

कर उद्धार दो गोविन्द , कर उद्धार दो गोविन्द

अब अवतार लो गोविन्द, अब अवतार लो गोविन्द...........

माखन रोता, मिश्री रोती , रोये कदम्ब की डाली

तज डाला है नाम हरी का, मुह पे रहती गाली

गीता सार दो गोविन्द, गीता सार दो गोविन्द

अब अवतार लो गोविन्द , अब अवतार लो गोविन्द...........

हम भी समझे, तुम भी समझे, समझे ये जग सारा
मिथ्या है माया में फंसना, हरि का नाम है प्यारा

भव से तार दो गोविन्द, भव से तार दो गोविन्द
अब अवतार लो गोविन्द, अब अवतार लो गोविन्द...........


---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"

वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/


गुरुवार, 19 जुलाई 2012

हमले होते रहेंगे.....


अक्सर लोग कहते है प्रभात जी आप अपनी लेखनी में इतना विकराल रूप कैसे रखते है?
अभी हाल में में प्रचलित मेरी कविता "हमले होते रहेंगे" पर भी लोगो ने इसी तरह की प्रतिक्रिया दी

मित्रो आप ही बताओ जब इस देश का पढ़ा युवा नौकरी के लिए भटके , आटा चीनी चावल तेल का भाव इतना की व्यक्ति उलझन में पड़ जाए की परचून की दूकान पर लेने जाए, या सुनार की।


और जनता की मेहनत के पैसे से विधायक अपनी गाडी में पेट्रोल भरवा कर काले शीशे चढ़ा कर इस तरह मुह फेर कर निकल जाए जैसे आम जनता अछूत हो।.


एक तरफ रोज 20 लाख लोग  भूखे पेट सोते हों  और दूसरी तरफ कसाब को बिरयानी और जेड प्लस सुरक्षा मुहैया करवाई जाए
क्या एक सच्चे देश प्रेमी का खून नहीं खौलेगा ?????


मेरी एक कविता की विडियो आपके हवाले करता हूँ,सिर्फ पांच मिनट मुझे मेरे शब्दों को मेरी कविता को दीजिये।


आप भी कहेंगे इन्कलाब जिंदाबाद 


http://www.youtube.com/watch?v=L6x-RfQcoJ8
---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
 वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/
 

शनिवार, 14 जुलाई 2012

खूबसूरत है तू जिंदगी के लिए .......


खूबसूरत है तू जिंदगी के लिए , 
मौसम है हसीं आशिकी के लिए ...........

कांटे चुभते रहे, और मैं हँसता रहा ,
फूल चुनता रहा बंदगी के लिए...........

यूँ तो गुल से भरा था मेरा आशियाँ 

दिल मचलता रहा एक कली के लिए........

अश्को-गम का समन्दर ही जो दे सका,
मैं तड़पता रहा बस उसी लिए.............

इतने खाए है खंजर ज़माने से सुन
हाथ उठता नहीं दोस्ती के लिए ............

---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
 वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/

रविवार, 17 जून 2012

एक जिस्म पर कई किरदार देखिये .....



एक नहीं हुज़ूर, सौ बार देखिये'
एक जिस्म पर कई, किरदार देखिये
मुनाफा खूब हो भी, तो क्यों ना हो 
गर्म है नकाब का, बाज़ार देखिये ......

सियासत, आप खुद ही जान लोगे
चोर को बना के पहरेदार देखिये.....

वफ़ा, प्यार, दोस्ती, मैं सब निभाता रहा 
और मैं ही बन गया हूँ गुनेहगार देखिये........

बुजुर्गो की निशानी नीलाम हो रही है,
मुझ पर यकीं नहीं,  इश्तेहार देखिये........

बेटी बेच आया बाप, दो रोटी के वास्ते 
खबर पक्की है साहब, अखबार देखिये.........

---------------------------------कवि  प्रभात "परवाना"

मंगलवार, 12 जून 2012

नशा मुक्ति केंद्र- हिला देने वाला अनुभव



दोस्तों आज आपसे एक बेहद ही खास अनुभव शेयर करता हूँ, 
जैसा कि आपको पता है हमारी संस्था ज्योति जागरूक समय समय पर कुछ ना कुछ सामाजिक काम जैसे अनाथ बच्चो कि मदद , वृद्ध आश्रम में आयोजन नशा मुक्ति केंद्र में काउंसलिंग आदि आदि करती रहती है ..

हाँ तो इस बार हमारी संस्था ने दिल्ली के द्वारका में स्थित नशा मुक्ति केंद्र में प्रोग्राम किया..
आप हैरान रह जाएंगे ये सोच कर कि वह क्या हुआ,.
मेरे शरीर का एक एक रोंगटा खड़ा हो गया वहा  आये हुए रोगियो को  देखकर..
अरे छोटे छोटे बच्चे 9 - 10 साल के बच्चे नशा मुक्ति केंद्र में जिन्हें अपना नाम लेना नहीं आता था वो नशा मुक्ति केंद्र में..
कोई माँ का पर्स चुरा कर नशा करता था, कोई भाई का मोबाइल बेचकर..
एक से एक सरकारी नौकरी में रह चुके एयर फ़ोर्स के व्यक्ति वह मौजूद थे जो नशा छुड़ाना चाहते थे..
पर सबसे बड़ा आश्चर्य मुझे उन छोटे छोटे बच्चो का हुआ ...

एक और हिला देने वाला अनुभव:--
एक बच्चे को ऐसा  नशा था की वो अपने आप को ब्लेड से काटता था..
समझे नहीं ??????

 मैं भी नहीं समझा था..
खुद को जख्मी करने का नशा..'
पूरा सर अपना ही अपने ही हाथो ब्लेड से काट रखा था. हालत ये थी की आप जख्म देख भी नहीं सकते ..और ना मैं आपको दिखा  सकता ..
मैंने वहा  उनकी काउंसिलिंग की..उन्हें नशा से होने वाली हानिया और नशा मुक्ति के उपाय भी बताये
ये भी बताया की नशे की हुड़क लगे तो क्या करना है .
पूरी विडिओ १८ मिनट की है.. 


शायद विडिओ की आवाज समझने में थोड़ी परेशानी हो..
लेकिन ये समझना उतना भी मुश्किल नहीं जितना नशे के साथ जीवन यापन करना.
मित्रो शुभ काम में देश भर से लोग हमारे साथ जुड़ रहे है. अगर आप भी हमसे जुड़ना चाहते है तो हमारी संस्था के नंबर 9212233555 पर संपर्क करे..

इस विडिओ को ज्यादा से ज्यादा फैलाए ताकि शायद किसी ऐसे व्यक्ति के पास पहुचे जो नशा छोड़ना चाहता हो..

---------------------------------कवि  प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"