शनिवार, 13 अगस्त 2011

सोच की शक्ति ....



ये कविता आपको नकारात्मक सोच से सकरात्मक सोच तक ले जाएगी.....बस महसूस कीजिये एक एक पंक्ति को और फिर पढ़िए


नकारात्मक सोच: (महसूस करे)
मैं आवारा पाती सा
बिन दीये जैसी बाती सा.
पीट पीट जो रोती रहती,
मैं बूढ़ी मा की छाती सा......


मैं जर्जर एक कश्ती  सा,
उजड़ी वीरा बस्ती सा
नाज़ुक सी पगडंडी सा मैं
जग जेल मे बंदी सा.....




सकरात्मक सोच::(महसूस कीजिए)
खुशहाली की पाती सा
रोशन करती बाती सा
लाल देख जो फूली रहती
उस बूढ़ी मा की छाती सा......


पार लगाती कश्ती   सा
दीवानो की बस्ती सा
हरीभरी पगडंडी सा
प्यार जेल मे बंदी सा......


मैं आशा की परिभाषा हू
कल कल बहती नदियो सा
खुशी बाटते एक मनुष सा
मनललचाते इंद्रधनुष सा.....


देखा  आपने??महसूस किया?  सही  सोच का  मन  पर  प्रभाव  :
बस अपने जीवन मे सही सोच रखिए रास्ते अपने आप मिलेंगे..

प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"



5 टिप्‍पणियां:

dileep vasishth ने कहा…

Shavdon me jeevan hai...jaisa jiyo vesa hi hai.

Rahul Yadav ने कहा…

accha fark mehsus karaya aapne ...

Er. Diwas Dinesh Gaur ने कहा…

प्रभात भाई, शानदार प्रस्तुति...सच में नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर ले जाती कविता...

SARITA ने कहा…

dhup mein chhupti chhayasa, phulon mein chubhti kanta sa, banzar mein uthti andhi sa, samundar mein dubti kasti sa..asmaan mein ghulti disha sa, jamin mein mitti nishan sa... jindegi bhulti lakshya sa moutse uthti haya sa... bhabanaon ka koi mel nehin..yeh to khuda ka khel koi.

NICE COMPARISON PRABHAT. KEEP IT UP, M SURE YOU WILL STAND IN THE FIRST ROW POETS WHO NOT ONLY CAN WRITE BEAUTIFUL POEMS BUT ALSO CAN CALL INDIA TO COME TOGETHER FOR A GOOD CAUSE TO SAVE OUR COUNTRY.

Pradip Kumar Sahni ने कहा…

bahut badhiya udharharan se aapne vyakhya ki hai. Aabhar..
mere bhi blog me aaye..

मेरी कविता