रविवार, 24 जुलाई 2011

आसुओ ने हँसना सिखा दिया...

मेरी एक आँख मे के आसू ने दूसरी आँख के आसू से पूछा,
कैसे हो...???????


खुशी का आसू बोला: बहुत खुश हू यार, आज क्या बताउ तुझे...
तू कैसा है?
दुख का आसू बोला: बहुत दुखी हू यार.. क्या बताउ तुझे
एक शरीर एक आत्मा, एक जीवन दो सोच कैसे?
दो एहसास वो भी साथ साथ...
तब दिल बोला यही जीवन है
यही जीवन की सच्चाई है.
इंसान यदि जीना चाहे तो फड़कता है
यदि मरना चाहे तो ता तड़पता है..
अगर ये जीवन है तो ये बनाया क्यू?
भौतिक साधनो से इसे सजाया क्यू?
इंसान का मन इसमे लगाया क्यू?
भगवान बोला: मैने जीवन इसलिए दिया की तू जी सके,
दूसरे के गम विश बना शंभू की तरह पी सके.
पर तूने खुद मायाजाल बनाया.
अपना मन इसमे बसाया
आज एक बात समझ मे आई है
सही मायने मे ये दुनिया पराई है
इसीलिए
किसी को मलहम ना दे सके तो आँखे नम ना दे,
किसी को खुशी ना दे सके तो कभी गम ना दे..



"प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना" 


5 टिप्‍पणियां:

dkjain_kaman ने कहा…

gud lines i like it...
ibadat kaun karta hai, inayat kaun karta hai, sabhi hain lootne wale hifajat kaun karta hai bhanwar ki gungunahat se hi ab har phool dartra hai, sabhi khilwad karte hain, mohabbat kaun karta hai...............

jayesh ने कहा…

good yar

SARITA ने कहा…

khuda ne banaya atmaa mehesoos karneko bhoutiktako, nehinto abtaar na lete usi parose hur khana chakhneko.. shiv jee bhi kahan pi gaye the garal jo bhi unke hisse padatha, suna hai kanthmein bharneki kala aa gayeethi to neelkanth ban gaye the oh. ; gar jindegi jini ho kuchh aisi abhyas karo dukh sukh, hasi gam saviko durr atmake jama karo.. jab bhagwan ke dwr khade ho, ye prasn aae kitna roya gam ke aasoo, bolna hamne khaya hi nehin , jama punji dekh lo.

संतोष तापडिया ने कहा…

दोस्त आपकी कविताये बहुत अच्छी लगी
काश हम भी लिख पाते..........
गम नही......लेकिन हम पढ़ बहुत अच्छा पाते

shailesh ने कहा…

laajwab