मंगलवार, 3 मई 2011

वो मेरे दीवाने हो गए है........



मेरी खामोशी के किस्से पुराने हो गए है,
लो जी वो मेरे दीवाने हो गए है,
नफरत थी उन्हें मेरे जिन गीतों से कभी
आज उनके लबो के तराने हो गए गए है,
मेरे घरोदें पर हसते देखा था उन्हें,
मेरे घर अब उनके घराने हो गए है,
नए नए आशिक की खुशबू है उनमे
वो कहते है उनको जमाने हो गए है
जी जलता रहा मै शम्मा की खातिर
खबर है की वो भी "परवाने" हो गए है...
मेरी खामोशी के किस्से पुराने हो गए है,
लो जी वो मेरे दीवाने हो गए है.........

प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"


3 टिप्‍पणियां:

dosto ka dost ने कहा…

bahut badiya janab bahut ache se sabdo ko piroya hai apne pad kar khusi hui shukriya !

Pradeep Tanwar ने कहा…

bahul hi umda likhte ho aap. really nice to read such such lines....

ekal ने कहा…

bahut hi sundar rachanaa hai aap ki keep it up!