गुरुवार, 30 जून 2011

नयी हवा का एक सलाम आया है

खौले से लहू का जाम आया है
नयी हवा का एक सलाम आया है
दर दर की ठोकरों में है ये देश साथियो 

उसे उठाने एक कलाम आया है...
बेचता था जो कभी अखबार दोस्तों,
आज अखबारों में उसका नाम आया है.....

मन की लगन विश्वास और कर्म ही कहो
वो राष्ट्रपति के पद के काम आया है....

हूँ"प्रभात"साथ तेरे थाम लूँगा हाथ
कलाम जी का ये पैगाम आया है
दर दर की ठोकरों में है ये देश साथियो,
उसे उठाने एक कलाम आया है...उसे उठाने एक कलाम आया है......

प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"


3 टिप्‍पणियां:

Ramkrishan Vaishnav ने कहा…

bahut hi shandar rachna hai mere dost.......
ham sab is muhim me sath hai......
KALAAM sir ko SALAAM.....
JAI BHARAT......

RAJ SINH ने कहा…

KALAM KO SALAM !

SARITA ने कहा…

JAI KALAAM, JAI KALAM.