गुरुवार, 17 नवंबर 2011

क्या फिर से सावन आया है?


मैंने दिल के बागीचे में कोपल पाया है,
क्या फिर से सावन आया है?
क्या फिर से सावन आया है?

अब हरा दिखाई देता है,
सब भरा दिखाई देता है,
मन के पंछी का पिंजड़ा भी,
अब धरा दिखाई देता है...

जाने कौन है परदेसी जो मन को भाया है,
क्या फिर से सावन आया है?
क्या फिर से सावन आया है?


मनचली पतंग सी उड़ जाऊ...
मनचाही गली में मुड़ जाऊ
रस्मे वादे ना समझू मैं,
बस सीधे उससे जुड़ जाऊ....

नैनन में जादू हाय कैसा ये डार के लाया है.........
क्या फिर से सावन आया है?
क्या फिर से सावन आया है?


                                    कवि प्रभात "परवाना"
वेबसाईट का पता:- http://prabhatkumarbhardwaj.webs.com/ 




2 टिप्‍पणियां:

Reena Maurya ने कहा…

waw..
very beautiful....

संजय भास्कर ने कहा…

.........................जानदार शेर .....उम्दा ग़ज़ल

संजय भास्कर
आदत......मुस्कुराने की
http://sanjaybhaskar.blogspot.com