रविवार, 10 अप्रैल 2011

प्यार से लूटती है वो , मजा ही कुछ और है.........


बूढ़े घुटनों का सवाल है सीड़ियो   पर,
बीज बगावत पर आज है पीड़ियो पर 
हालात-ए-क़त्ल, रंजिश की हद्द है ये,
मोती तक शक करते है सीपीओ पर 



चुपके चुपके आसुओ से मुलाकात करते है वो,
चांदनी रात झील किनारा याद करते है वो 
देर की हद्द देखिए हुज़ूर
मेरी कब्र पर आकर वफ़ा की बात करते है वो.

ये दिल तेरा दीदार क्यों करता है,
जीत कर भी अपनी हार क्यों करता है,
प्यार की हद्द है उसका मरजाना ,क्यों आखिर क्यों?
परवाना शम्मा से इतना प्यार क्यों करता है 


पल पल करने में ये पल निकल गया,
और पता ही ना चला किस पल में मै पल गया
उसे बदल की कोशिश में फिर चला मै, हद्द फिर हुई,
और कमाल है उसकी ही तासीर में ढल गया

चलो आज आपकी मजबूरी ने हमें ये सबक दे दिया,
बुझ गया एक तेल की कमी से तड़पता दिया 

मेरी खुशी आपसे है,
मेरे गम आपसे है,
कुछ ज्यादा अहमियत नहीं आपकी फिर भी,
मेरे जिस्म का दम आपसे है

ये तो आपका प्यार है, वरना मेरे दिवानो की तादात है हजारो में,
ये आपकी किस्मत है की मैंने आपको चुना
 वरना उम्मीदवार और भी है हुस्न के बाजारों में 

साफ़ नहीं कहती उसकी रजा ही कुछ और है,
प्यार से लूटती है वो , मजा ही कुछ और है,
फर्क नहीं इस पत्थर को किसी भी मार का 
उसके आँखों के कोड़ो की सजा ही कुछ और है

प्रभात कुमार भारद्वाज "परवाना"   

1 टिप्पणी:

sanjay swami ने कहा…

parbhat gi wah wah ......... main aapka fan ho gaya hun kya likhten hai .......