सोमवार, 7 मार्च 2011

मेरा दिल तो तेरे चाँद के पास है.

मैंने खुदा से कहा तुने चाँद क्यों बनाया?
खुदा बोला ताकि जमीं के हर चाँद को पता चले की चाँद में दाग है,
मैंने कहा की मेरे चाँद पर दाग कहा?
खुदा बोला तू खुद अपने चाँद पर दाग है,
मैंने कहा अपने दिल से पूछ ए खुदा,
खुदा बोला :"मेरा दिल तो तेरे चाँद  के पास है.
किस कदर गिर गया खुदा मेरे चाँद के वास्ते,
अब कौन कहेगा खुदा बेदाग़ है?
अब कौन कहेगा खुदा बेदाग़ है?
 
प्रभात कुमार भारद्वाज "परवाना"




2 टिप्‍पणियां:

chetan ने कहा…

bhai teri sari poems ek dum dhamakedaar hai or sari ki sari ek se badkar ek hai.
I have the best poet as my frnd........

kumar ने कहा…

umda bhut khub bndhu!
what a great imagination u hv!
aapki rchnaye sb se htkr h aur dil ko chuu jate h...